क्या आप छिंदवाड़ा जिले के है ?

    छिंदवाड़ा जिला अपने आप मे ढेर सारी व्यवस्थाओं के कारण फेमस जगह है ।आदिवासी, हरिजन की विधान सभा क्षेत्र आदि वासी बाहुल क्षेत्र है । लोग सीधे-साधी विचारधारा के लोग है ।पहले-पहल यहा पर कोयले की खदाने थी जो समयानुसार धीरे-धीरे बंद हो गई । काग्रेसी विचार- धाराओं के लोग ज्यादातर है यहा के गांव के लोग अभी भी बीजेपी के लोगो को शरणार्थी मानते है और आर एस एस के लोगो को अच्छा नही मानते है । चूंकि उस समय जितने भी जनसंघ और आर एस एस राष्ट्रीय स्वंंम् सेवक संघ मे लोग थे वे सब सिंधी,पंजाबी थे और बंटवारे मे पाकिस्तान से भारत आऐ थे । यही विचारधारा अभी उनके भीतर है । समयानुसार अब धीरे धीरे अब लोगो की विचारधारा मे परिवर्तन आने लगा है । श्री कमल नाथ परिवार बाहर के रहने वाले है । छिन्दवाड़ा की सीट से काग्रेस के उम्मीदवार बने और यही पर आकर बस गए विधायक, सांसद, मंत्री,मुख्यमंत्री विपक्ष के नेता बने । इनके दिन और समय बदल सकता है किंतु प्रयास करना पड़ेगा और वह प्रयास का रास्ता है गुरुजीसत्यवादी श्रीरामधुन के पास है ।
    वर्तमान समय मे काग्रेंस का अस्तित्व खतरे मे है ,कारण गांधी नेहरु और परिवारवाद है ।वैसे तो संघ परिवार मे भी परिवारवाद चल रहा है 21 वी शदी चल रही है जमाना बदला,पार्टियां के भी दिन बदले जिन पार्टियों को लोगो ने नकारा घोषित कर दिया था वह ही सरकार चला रही है । इन सत्तारूढ़ पार्टियों से छिंदवाड़ा वालो को कोई लेना देना नही है । यहां के लोगो को काम दिखता है उसी के अनुसार वोटिंग भी होती है । आज कमलनाथ का नाम चलता है किंतु वे छिंदवाड़ा जिले के मूल निवासी नही है और ना ही उनके सुपुत्र नकूलनाथ ही  छिंदवाड़ा के मूल निवासी है । यह एक परिवारवाद के अंतर्गत है । अतः इसे बदलने की आवश्यकता है और यह तभी हो सकता है जब यहां के लोगो की विचारधारा चैंज होगी । हर पार्टी मे परिवारवाद चल रहा है इसे बंद करना चाहिए ।इसके लिए अलग से नियम बनाकर लागू किया जावे ऐसा सरकार से अपील है । 
छिंदवाड़ा का इतिहास
छिन्दवाड़ा का गठन
छिंदवाड़ा जिले का गठन 1 नवंबर 1956 को हुआ सतपुरा पर्वत माला के दक्षिण पश्चिम में स्थित है।
छिंदवाड़ा का इतिहास 
प्राचीन साहित्य में इस क्षेत्र में अनेक उल्लेख प्राप्त होते हैं जनपद छिंदवाड़ा जनपद वैदिक युग में  छेद देश का अंग रहा है ।बौद्ध तथा जैन साहित्य में छेद इस देश के अंतर्गत इसका उल्लेख मिलता है सम्राट समुद्रगुप्त द्वारा 18 राज्यों में से एक छिंदवाड़ा था । छिंदवाड़ा जिले के नाम से गोरी नदी के पानी के उपकरण और वृक्ष की प्राप्ति द्वारा क्षेत्र की प्राचीनता सिद्ध होती है
* गोंडवाना वंश ने भी इस क्षेत्र में शासन किया इस क्षेत्र को देवगढ़ पर राजधानी बनाया । गोंड समुदाय के राजा जाटव ने देवगढ़ किले का निर्माण किया है भक्तों बुलंद राजा वंश में सबसे शक्तिशाली था , और उन्होंने सम्राट औरंगजेब के शासन के दौरान मुस्लिम धर्म को अपना दिया था ।बाद में कई शासकों ने यहां राज किया और आखिरकार मराठा शासन 1803 में खत्म हुआ।
छिंदवाड़ा नाम क्यों पड़ा
इस क्षेत्र में छींद ,खजूर के वृक्षों की अधिकता के का इसका नाम छिंदवाड़ा पड़ा
छिंदवाड़ा की विशेषताऐ 
* छिंदवाड़ा जिले में प्रथम स्वतंत्रता आंदोलन 1857 -58 में शुरू हुआ था जिसमें तात्या टोपे का आगमन हुआ था
* महात्मा गांधी ने 6 जनवरी 1921 को पंडित जवाहरलाल नेहरू 31 दिसंबर 1936 को और 18 अप्रैल 1922 को सरोजनी नायडू यहां आए थे ।
* छिंदवाड़ा जिले स्वतंत्रता  संग्राम क्रांतिकारी जनता सोनपुर के जागीरदार श्री ठाकुर साहब, राजभाषा जागीरदार प्रतापगढ़ ,और श्री महावीर सिंह जागीरदार हर्रा कोड बादल भाई बाबरा ,स्वामी रामानंद ,  अमरवाड़ा राजाराम शुक्ला छिंदवाड़ा ,  अतुल रहमान छिंदवाड़ा नागपुर लक्ष्मण गोसाई सुमन राव मनोरा
छिंदवाड़ा  मे वर्तमान मे -
* छिंदवाड़ा जिले के अंतर्गत 7 विधानसभा क्षेत्र आते हैं वर्तमान में छिंदवाड़ा जिले को 7:00 अनु विभाग में और 11 खंडों में बांटा गया है जिन्हें को वर्तमान में 13 से तहसीलों में विभाजित किया गया है छिंदवाड़ा जिले ने 22 पुलिस स्टेशन एक एजे के और एफटी-20 वाली छिंदवाड़ा जिले में 803 ग्राम पंचायत जिसमें 13 मंडल और 11 जनपद पंचायत क्लॉक शामिल है
छिंदवाड़ा के महत्वपूर्ण तथ्य -
छिंदवाड़ा क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा जिला है यहां की जनता क्या लगभग 2090 306 व्यक्ति हैं । क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा जिला है 11815 वर्ग किलोमीटर के दायरे में। पातालकोट की भारिया जनजाति यही पाई जाती है रष्ट्रीय उद्यान का कुछ भाग भी इसी जिले में है हिंदुस्तान लीवर लिमिटेड का कारखाना भी यहीं पर स्थित है पांढुर्णा
में गोटमार प्रथा प्रचलित है आदिवासी कला संग्रहालय छिंदवाड़ा में स्थापित किया गया है गुरु जनजाति पाई जाती है । एग्रो कंपलेक्स छिंदवाड़ा में है । पेंच राष्ट्रीय उद्यान में मोगली लैंड बनाया जा रहा है कोयला तांबा उत्पादन क्षेत्र में है मध्य प्रदेश के कुल क्षेत्र का 3.3% का है सर्वाधिक भारिया जनजाति का निवास स्थान कोटा जिले में ही स्थित है ।
प्रमुख ओद्योगिक इकाईयां- 
हिंदुस्तान लीवर लिमिटेड लहगडुआ, रेमंड उलन मिल्स लिमिटेड बोरगांव, पीबीएम पॉलिटेक्स लिमिटेड बोरगांव, सुपर पैक बजाज ग्राम सांवली ,भंसाली इंजीनियरिंग पॉलीमर्स ,79 सूर्यवंशी स्पिनिंग मिल जना शशिकांत एंड कंपनी जुन्नारदेव ,  रूबी इंजीनियरिंग इंडस्ट्रीज हरि छिंदवाड़ा
पर्यटन स्थल
पातालकोट घाटी 17 किलोमीटर दो के क्षेत्र में फैली हुई है समुद्र स्तर से 2750 3250 की औसत ऊंचाई 5.24 से 22 दशमलव 29 डिग्री उत्तर और 78 और 3 से 78 डिग्री पूर्व तक भतार घाटी उत्तर पश्चिम दिशा में छिंदवाड़ा से 78 किलोमीटर और उत्तर पूर्व दिशा से मैं तामिया से 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है
    पातालकोट में प्रतिवर्ष अक्टूबर के महीने में सतपुरा एडवेंचर स्पोर्ट्स फेस्टिवल नामक एक बार आयोजित किया जाता है
अन्य जानकारियां ;-
* पेंच राष्ट्रीय उद्धान
* देवगढ़ किला
* पाडुरना का गोठमार मेला
* सिमरिया हनुमान 101 फीट उच्च फीट मूर्ति ।
* अन्नपूर्णा देवी घोघरा 
* जाम सावरी हनुमानजी की लेटी
* हिंगलाज मंदिर जामई 
* महादेव जातरा की प्रथम सीड़ी
   प्रचीन मंदिर जहा के पुजारी ब्राह्मण ना होकर अन्य जाती के लोग है । यह जुन्नारदेव तहसील की शान है जहां पानी के झरनो से हमेशा 24 घंटे पानी बहते रहता है। यह जगह बड़ी रमणीक मनमोहक धार्मिक स्थल हे जहां पर गर्मी के दिनो भीड़भाड़ रहती ही है । साथ ही साथ सभी तीज त्योहार पर भीड़भाड़ रहती है । शिवरात्रि के समय पर यहां मेला जैसा लगा रहता है । महदेव जातरा करने वाले लोग यहांं विश्राम करके अपनी पैदल जातरा शुरु करते हे ।  महादेव की जातरा पचमढी होशंगाबाद जिला मे स्थित है ।इस यात्रा का लुप्त उठाने के लिऐ पैदल जाते है।
यहां की भव्यता की छठा ही बड़ी सुंदर है । इस यात्रा के बाद लोग कश्मीर को भूल जाऐगे ऐसा दावा करते है गुरुजीसत्यवादी श्रीरामधुन। किंतु म०प्र० सरकार यहा आकर विधान सभा का सत्र तो चला सकती है किन्तु यहां के उत्थान के बारे मे कभी नही सोचती है । आपने छिंदवाड़ा नही घूमा तो कही नही घूमा । छिंदवाड़ा आपका स्वागत करता है । यदि आप छिंदवाड़ा के मूल निवासी हैं तो उसकी यादो को समेटे हुऐ एक दूसरे के सम्पर्क मे जरूर रहे और मेरे द्वारा प्रसारित लेख "क्या आप छिंदवाड़ा जिले के है ?" पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करे ताकि आपकी समस्याओं का निराकरण किया जा सके । इस संबंध मे लोगो से भी फैस के माध्यम से जानकारी मांगी गई थी उस समय श्री कमल नाथ म०प्र० के मुख्यमंत्री थे तब छिंदवाड़ा वालो ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त नही की थी अब जागने का समय आ गया है गुरुजीसत्यवादी भी आपके साथ है अब तो जागो छिंदवाड़ा जिले के कर्णधारों । छिंदवाड़ा के बारे मे अगले लेख का इंतजार करे --

गुरुजीसत्यवादी श्रीरामधुन

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