*"जैसा खाओगे अन्न,वैसा बनेगा मन"*

   जैसा खाना खाओगे उसी के अनुरुप आपका मन काम करेगा, इस कहावत का अर्थ बतलाते हुए ,गुरुजीसत्यवादी
का कथन है कि हमारे शरीर के संचालन मे भोजन का महत्वपूर्ण स्थान होता है ।भोजन से सबसे ज्यादा मारे शरीर के मन ,मस्तिष्क पर प्रभाव पड़ता है । अतः भोजन संतुलित ले और अच्छा ले । अच्छा भोजन के बारे मे लोगो मे लोगो ने निम्न प्रकार से जानना चाहा :-
(1) अच्छा भोजन का अर्थ क्या है?
(2) अच्छा भोजन कहां मिलता है ?
(3) अच्छा भोजन कौन पकाता है ?
(4) भोजन का असर शरीर के किन - अंगो को प्रभावित करता है ?
(5) भोजन कहा-कहा और किस किस जगह का प्राप्त करना चाहिए ?
(6) भोजन के अलावा अन्य भोज्य पदार्थों को बाहर से खाया जाए?
(7) उक्त सभी बातो का उत्तर बिन्दुवार तरीके से विस्तारपूर्वक बतला रहै गुरुजीसत्यवादी श्रीरामधुन जी जो टीलेश्वर माहरज भोपाल :-
    (1) अच्छा भोजन शुध्द शाकाहारी और सात्विक भोजन होता ।
    (2) घर गृहस्थी मे गृहणियों द्वारा पकाया हुआ होता । जो गृहणियों सुबह सुबह उठकर नित्यकर्म से निवृत्त होकर ,नाह धोकर साफ वस्त्रो को धारणकर खाना पकाती है उनसे प्राप्त भोजन शुध्द भोजन होता है ।
  (3) खाना पकाते समय गृहस्थ जीवन के नियमानुसार जो भी खाना पकाया जाता है वह शुध्द भोजन कहलाता है ऐसे भोजन मे मन की भावनाएं जुड़ी रहती है ।
  (4) भोजन को सार्वजनिक रुप से सबके सामने गृहण नही करना चाहिए भोजन हमारे जीवन का महत्वपूर्ण है और अभिन्न पदार्थ है ।खाना खाते समय बातचीत ना करे और ना ही थाली से बार बार उठना नही चाहिए । खाना रोजाना की भांति थोड़ा कम ही ले और आधे एक घन्टे बाद ही कम से कम तीन गिलास पानी पीऐ । परोसी थाली मे अन्न का भी दाना ना छोड़े । भोजन प्राप्ति से पूर्व और बाद मे प्रणाम करे । और हाँ खाना खाते समय टी वी और मोबाइल जरुर बंद कर दे । खाना जिसने भी पकाया वह स्वास्थ होना चाहिए । उसे मानसिक टेंशन से भी मुक्त होना चाहिये चूंकि खाना पकाते समय हर कार्यो मे एक भाव चलता है और उसका अच्छा या बुरा भाव चलायमान होता है और कार्य करने की क्रिया के द्वारा पूरे खाना को प्रभावित करती है और उसी भावनाओं का प्रभाव खाने वाले पर पड़ता है ।अच्छी भावनाओं से पकाया हुआ खाना शरीर को तो लाभ पहुचाता ही है बल्कि हमारे भविष्य को भी सुरक्षित रखते हुए  अच्छा रास्ता खोलता है । तभी तो कहा गया है कि "जैसा खाओगे अन्न, वैसा बनेगा मन"
     अतः इस लेख पढ़ने के बाद हर परिवार, हर समाज को चाहिए कि वै अपने घर का महोल खुशनुमा बनाने हेतु उक्त बातो का पालन करे और लोगो से करवाऐ और इसे दिनचर्या का एक नियम बनाकर करते रहे आपके जीवन मे कभी कोई परेशानियों नही आएगी ऐसा मानना है
 गुरुजीसत्यवादी श्रीरामधुन का ।

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