मेरा आइना,मै स्वयं !
आज सब कुछ बदलता जा रहा है । दुनिया कहां से कहा पहुच रही है लोग अपने आपको भी पहचानने से इंकार कर रहे है और दर्पण के सामने खड़े होकर अपने आप से अनेको सवाल कर रहे है।
आज स्थितियो मे काफी परिवर्तन आ चुका है । आईना पर दिखने वाला प्रतिबिंब भी बदलते जा रहा है और बीच-बीच मे अनेको सवाल पूछते रहता है । कल-आज-कल का इतिहास-वर्तमान-भविष्य के बारे मे ढेरो सवाल पूछता आईना मे उलझता आम- मानव दुविधा मे है । जब आप नकारात्मक बातों को भूलकर आगे बढ़ जाते हैं तो इसके परिणाम ना केवल आपके सिर से बहुत बड़ा बोझ उतर जाता है बल्कि आपके स्वयं के प्रति प्रेम का द्वार भी खुल जाता है । हमे अपनी सोच बदलने के लिऐ कुछ उपाय करते रहना चाहिए :-
1* स्वयं की आलोचना करना बंद करें !
2* सबसे पहले उस आईना मे देखे कि हमारी गलती कहां हो रही है ?
3* हमारे मन मे चल रहे बुरेविचार नाकारात्मता भाव को हटा कर साकारात्मक भाव लाऐ ।साथ ही स्वयं की आलोचना करना भी बंद करे ।
4* हमें अपने आप को डराना भी बंद करना होगा ।
6* स्वयं के प्रति विनम्र और धैर्यवान बने।
7* हम सभी गलतियां करते हैं
8* अपने मन के प्रति दयाशील होना चाहिए
9 * स्वयं को सहारा देना है ।
हमारे मन को मजबूत कर अच्छे निर्णय ही हमारा जीवन को सार्थक बनाएगें ।ताकि हम आईना मे प्रतिबिंब को सही सही जबाब दे पाएगे । हमे आईना मे अपना चेहरे तो दिखता है किन्तु उसी मे अपना भविष्य भी तलाशना है और अपनी इच्छाशक्ति से अपने प्रतिबिंब के अलावा उस प्रतिबिंब का दृष्टिकोचर करना है और उसे आदेशित करना है ,यह ऐसा बार बार करने से सामने वाला प्रतिबिंब हमारा काम कर देगा । रिसर्च करने वालो ने भी इस बात की पुष्टि की है और साथ ही यह भी कहा है कि इंसान चाहे वह किसी भी रिस्ते मे बंधा हो ( माँ-बाप,बेटा-बेटी,भाई- बहन, यार-दोस्त ) हर कोई जो भी कार्य करता है वह अच्छा या बुरा हो,अपने लिऐ ही करता है और उसका फल भी उसे ही मिलता है ।
गुरुजीसत्यवादी श्रीरामधुन ने अपने आईना मे प्रतिबिंब के अलावा जो कुछ देखा वो सब हुआ किंतु वो नही हुआ जो होना चाहिए था । इसकी सबसे बड़ी वजय है हमारी सरकार के सरकारी अफसर और नेता जिन्होने अपने लोभ लालच के लिए सभी कार्य नियम-विरुध्द कार्य का भरपूर लाभ उठाया हैं । जो भी राजनीति मे गया समझो उसमे इंसानियत समाप्त और लोभ लालच मे फंस गया और उसी दलदल मे जीवन जीना आरम्भ कर देता है । काम कम करता है और ज्यादा बोलना,झूठ बोलना ,गुमराह करना शुरु कर देता है । इसी नेता का नाम और काम गांव की पंचायत के पंच,सरपंज-से पार्षद-मेयर,विधायक से मुख्यमंत्री सांसद से प्रधानमंत्री तक बनने की चाहत मे अपनी शुरू की घोषित आय का स्तर पर दरस्तर बढ़ता जाता है । आखिरकार यह क्या काम करता है ? सिवाय भ्रष्टाचार? ये सब ठीक है इनके कारण से देश मे जो नुकसान होता है वो अलग बात है जैसे अभी महाराष्ट्र की सरकार मे सत्ता को लेकर घमासान चल रहा है । इसी तरह की घटना म०प्र० मे भी इन नेताओ की खरीद-फरोक्त,नीलामी भी हो चुकी है । जब हम इसकी तह मे पहुचते है तो आईना की दुकान के सामने अपने आपको खड़ा पाते है और उन आईनो के सामने खड़ा पाते है उन बेनकाब अफसरो के साथ साथ इन भ्रष्ट नेताओं को । ये लोग तो आईना के सामने खड़े होकर आमजनता को ही आईना दिखा रहे है । ये लोग तो अपना समय पास कर ही रहे है,कुत्तो की मौत भी मर रहे है और हमे भी मार रहे है। ऐसे मे हमने जो मोदी जी का सपना देखा था ,उसका क्या होगा ? वो अच्छे दिन कब आएगे ?आमजनो के खाते मे पद्रह लाख कब आऐगें ? आमजनो को विश्वास
है कि एक ना दिन ये भ्रष्टाचार का आईना टूटेगा और खुशहाल भारत की आवाम राहत और अपने आप सुरक्षित महसूस करेगी ।
Comments
Post a Comment