दिपावली पर हुई क्षति का जिम्मेदार कौन ?
वर्षो से दिपावली का त्योहार मनाऐ जाने की परम्परा चली आ रही है ।
पहले दीपो की रोशनी से दिपावली मनाई जाती थी । सभी लोग मिलजुलकर एक दूसरे के साथ खुशी मनाते थे । धीरे धीरे समय बदलता रहा । त्यौहारों का स्वरूप भी बदला किन्तु लक्ष्मी माता वही रही ।
आधुनिक युग मे बारुद के ढेर पर बैठा हुआ मानव अपनी तथा दूसरो की जिंदगी से पठाखो से क्षति पहुचाने के आतुर है । प्रायः प्रायः हर साल सरकार को आर्थिक रूप से लाभ पहुचता है तो दूसरी तरफ से बारुद का गलत इस्तेमाल करने से भी लाभ मिलता है । जब सरकार के साथ साथ व्यवसायी को लाभ मिलता है तो हानि की भी जिम्मेदारी भी इन्ही की होना चाहिए किन्तु ऐसा नही है । यहाँ पर लेख लिखने का मुख्य उध्देश्य यह है कि - " लाभ लेने वाले,क्षति की पूर्ति करे " इस संबंध मे सरकार और माननीय न्यायालयो को आगे आकर कानून के दायरे मे लेना होगा" ।
इस बार की दीपावली मे जन धन हानि तो हुई है जिसे एक हादसा मानकर फाईले बंद कर दी जाती हैं। किन्तु अब ऐसा नही हे सरकार इसे कानून के दायरे मे लाने की सोच रही है। टूस्ट माँ आदिशक्ति दरबार धार्मिक एवं परमार्थ टूस्ट भोपाल के तत्वावधान मे डे-केयर सेंटर चलाया जाता है जिसमे 150 से ज्यादा बुजुर्ग लोग आते जाते है। इस बार पटाखों की धमक से 8 लोगों के कान के पर्दे फट गए दीपाली पर छिन गई 3 बच्चों की आंखों की रोशनी दिवाली के अनुसार दिवाली के अवसर पर 2 साल बाद लोगों ने जमकर आतिशबाजी की दीपावली के दोष में कई लोग होश खो बैठे और दुर्घटना के शिकार हो गए शहर में ऐसी कई घटनाएं हुई जिसमें पटाखे फोड़ने के दौरान लोग घायल हुए तेज धमाकों की आवाज से 8 लोगों को उनके कान के पर्दे फट गए इनका उपवास उपचार हमीदिया सहित अन्य अस्पतालों में किया गया गंभीर रूप से जलने का सिर्फ एक मामला सामने आया जिसे एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया जानकारी के मुताबिक प्रतिबंध के भाव प्रतिबंध होने के बावजूद लोगों ने तेज धमाके वाले सुतली बम का उपयोग किया जिससे कई लोगों के कान के पर्दे फट गए सी टीचर ने जैसी एकात्मक वे लोग अस्पताल पहुंचे तो जांच में पता चला कि इन लोगों के कान के पर्दे फट गए हैं नेत्र रोग विशेषज्ञ ने बताया कि धमाके के बाद कई लोग ओके कान में सुनाई ना देना सीटी बजने जैसी शिकायतें हुई है इनमें से कुछ लोगों के कारण कान के कान में गर्म सरसों का तेल डाल दिया उन्होंने बताया कि बुधवार को ऐसे ही एक मामले में 15 साल के एक बच्चे को रस्सी बम फटने के बाद से ही कान में सनसनाहट हो रही थी परिजनों ने सरसों का तेल डाल दिया जिससे उसे दर्द होने लगा जब हमने एंड्राइड को डालकर देखा तो कान का पर्दा फटा हुआ मिला हमीदिया अस्पताल में ही मामले पहुंचे जिसमें तेज धमाकों से कान के पर्दे को नुकसान पहुंचा है एम्स में दो और निजी अस्पताल में तीन मामले पहुंचे हैं।
बच्चों की आंख भर आई गंभीर चोट हुई सर्जरी
गांधी मेडिकल कॉलेज के आई कंसंट्रेट डॉक्टर सुरती ने बताया कि 3 मासूम बच्चों की एक आंख पर गंभीर चोट आई है अभी एक सर्जरी की गई तो इसके बाद एक और सर्जरी की जाना है जिसके बाद सही स्थिति सामने आएगी उन्होंने बताया कि हादसों में 10 11 और 13 साल के तीन बच्चों को नुकसान पहुंचा है इन सभी मामलों में लापरवाही सामने आई है नहीं काम आए इमरजेंसी नंबर।
एम एच ओ के निर्देश पर सभी अस्पतालों में इमरजेंसी नंबर जारी किए थे कई लोगों ने की पावती के दौरान हादसे के बाद इन नंबरों पर कॉल किए लेकिन उन्हें जानकारी नहीं दी गई जहांगीराबाद निवासी ने बताया कि उन्होंने रात 11:00 1:30 बजे जेपी अस्पताल के इमरजेंसी नंबर पर तीन बार कॉल किया लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया इसी तरह हमेशा अस्पताल के फोन नंबर पर किसी डॉक्टर ना होने की बात कही गई है।
उकत परिस्थितियों को ध्यान मे रखते हुऐ अब शासन को ही सख्त होने की आवश्यकता है ।
लेखक-आलोचक -काउंसलर
" श्रीरामधुन "
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