धनागमन पर लक्ष्मीपति सरकार की रोक - तुरंत बहाल हो ।"श्रीरामधुन"
"धनागमन पर लक्ष्मीषति सरकार की रोक " - बहाल हो !
लगाना उचित है अथवा अनुचित इसके फैसले की घड़ी का
समय आ चुका है सबसे पहले म०प्र० बाद मे भारत का इतिहास मे
मोदी सरकार । "एक झूठा एक सच्चा" किसने किसका साथ दिया और किसने क्या क्या सोचकर कार्य को अंजाम दिया । किस किस ने धर्म का मजाक उड़ाया है और व्यसायिककरण किया है और भोली -भाली जनता का मजाक उड़ाया है ।
" माँ आदिशक्ति दर० धार्मिक एवं
परमार्थ टूस्ट " भोपाल "
पंजियन क्र 03/16-11-2010
"गांधी-मोदी विचारक टूस्ट"
"धार्मिक एवं समाजिक टूस्ट"
आयकर अधिनियम 1961के अंतर्गत
(1) 12 ऐ की मान्यता
(2) 80 जी की मान्यता
टूस्ट द्वारा प्रकाशित समाचार-पत्र-
व पत्रिका -
* स० समाचार पत्र - आर्यवंश
* मासिक पत्रीका- आज का सत्यवादी
समाजिक न्याय एवं निशक्तजन कल्याण विभाग मे पंजीकृत -
वरिष्ठ जन - निशक्तजन सेवा एवं काउंसलिंग सेवाओ के अंतर्गत पंजीयन व निरीक्षण - अभी भी प्रकरण विचाराधीन है ।
कोरोनाकाल मे टूस्ट द्वारा अनेको जनहित मे कार्य किऐ जिसमे टूस्ट की जमा पूंजी समाप्त हो ग ई तब टूस्ट द्वारा सरकार को टूस्ट की अधिमान्यता, अनुदान व भूमि आंंवटन हेतु लिखा गया किंतु कार्यवाही ना होने के कारण मान० राष्ट्रपति मान०राज्यपाल जी के साथ साथ संबंधित विभागो को प्रधक प्रथक रुप से रजिस्टर्ड डाक
द्वारा अपीलीय आवेदन -पत्र भेजे गये ,स्मरण पत्र भेजकर सभी प्रमाणपत्रो और सरकारी सुविधाएं वापिस करने हेतु अंतिम पत्र भैजा गया फिर भी कोई कार्यवाही नही हुई । अभी भी प्रकरण सरकार के पास विचाराधीन है ।
तदोपरान्त टूस्ट के संस्थापक- संपादक-अध्यक्ष-काउंसलर श्रीरामधुन द्वारा 2023-
24 चुनाव का वहिस्कार किया और अज्ञातवास पर चले गये । आज का दिन अज्ञातवास का 14 वां दिन है ।
टूस्टी रामधुन द्वारा शोसल मीडिया मे लेखक-आलोचक के रुप अनेको लेख लिखे ओर ब्लागरपोस्ट पर डाले है फिर भी आश्चर्य की बात है कि मेरी तथा मेरे टूस्ट की बाते सरकार तक नही पहुंची ?
शायद उम्र का अंदाजा लगाकर सरकार ने सोचा होगा कि कोई भी कार्य करो ही मत मै चिल्लाते चिल्लाते मर जाऐगा सरकारी पैसा बच जाऐगा । किन्तु ऐसा नही है मेरे साथ भगवान और देश का कानून भी है ।
"संविधान दिवस पर राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा-" खर्च "और "भाषा" न्याय चाहने वाले नागरिकों के लिए बाधाऐ हे - सीजीआई की उपस्थिति में राष्ट्रपति में अखिल भारतीय न्यायिक सेवा की वकालत की । संविधान दिवस कार्यक्रम के दौरान सीजीआई बाय चंद्रचूड ने कहा कि लोगों को बिना डरे अदालत में आना चाहिए उन्होंने कहा भारत एक एक सुप्रीम कोर्ट दुनिया में एकलोता कोर्ट है जहां कोई भी नागरिक चिट्ठी लिख किसी भी समस्या का हल निकालने को कह सकता है । न्याय मूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा जिस तरह संविधान में स्थापित लोकतांत्रिक संस्थाओं और प्रक्रियाओं के माध्यम से राजनीतिक मतभेदो को हल करने की अनुमति देता है । अदालती प्रणाली स्थापित सिद्धांतों और प्रक्रियाओ के माध्यम से क ई असहमतियों को सुलझाने में मदद करती है । उन्होंने यह भी कहा कि 7 दशकों में भारत के उच्चतम न्यायालय ने लोक अदालत के रूप में काम किया है । हजारों नागरिकों ने इस विश्वास के साथ इसके दरवाजे खटखटाऐ है कि उन्हें इस संस्था के माध्यम से न्याय मिलेगा ।"
टूस्ट के अध्यक्ष श्रीरामधुन जी ने अपनी इस धार्मिक प्रक्रिया करने के पश्चात समस्त प्रमाणिक दस्तावेजो को लेकर लोक अदालत का दरवाजा खटखटाऐगे ।
टूस्ट के धन का मन पर लक्ष्मीपति सरकार ने जो रोक लगा रखी है उसे तुरंत बाहर किया जाकर ट्रस्ट की सहायता की जाए तो अति उत्तम होगा बस इसके आगे क्या लिखूं क्या ना लिखूं सब निरर्थक सा लगता है अब तो सरकार पर से विश्वास ही उठने लगा है ।
वही जस्टिस संजीव खन्ना ने कहा है कि भारतीय संविधान लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित करने वाला एक जीवित दस्तावेज है कानून को सरल सुलभ अधिक मानवीय और युवा पीढ़ी के लिए प्रसाद प्रासंगिक बनाने की सख्त जरूरत है
लेखक-आलोचक- काउंसलर -
अध्यक्ष
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