कोई तो खास है जो भुलाया नही जा सकता ! "श्रीरामधुन"
"कोई तो खास है जिसे भुलाया नही जा सकता है "
यह कोई शायरी नही है बल्कि यह एक हकीकत है कि हर इंसान
के जीवन मे एक खास बात होती है जो किसी भी कीमत पर भुलाया नही जा सकता है । उसी खास बात के बारे मे पता लगाने की कोशिश की जा रही है । यह किसी भी कीमत पर नही भुलाया जा सकता वह इंसान से संबंधित रिस्तो के बारे मे तो है ही नही । वह एक खास बात है जिसे भुलाया नही जा सकता है । यह सवाल माँ-बाप, भाई-बहन, पति-पत्नी,यार-दोस्त, प्रेमी-प्रमिका, बच्चा-बच्ची, लड़का-लड़की का नही है और ना ही उनकी आदतो,हरकतो से भी संबंधित नही है । यहां पर हम उस बात की ओर इसारा कर रहे है जिसमे हकीकत छुपी है । कोई ऐसी बात है जो समझ से परे है लेकिन वही बात को जानने के लिऐ हम उत्साहित भी है । जिसे हम धीरे धीरे भूलते जा रहे है । याद तो आती है लेकिन उस पर विश्वास नही किया जा सकता । मै उस चीज की बात कर रहा हूं जो सबके लिऐ खास है लेकिन धीरे-धीरे भूलने लगे हे तो ऐसे मे हम भी क्या कर सकते है । जब उन्होने कुछ नही किया तो कोई भी कुछ नही कर सकता है । कोई तो खास वस्तु हे जो इंसानो से छूटती जा रही है फिरभी उसे कोई गम या दुखक्षनही है । अभी तो उसकी कमी नही अखर रही है किंतु आने वाले समय मे उसे अपनाना ही होगा तभी शांति मिलेगी ।
हम जब तक किसी चीज को महत्व नही देगे तब तक कैसे पता चलेगा कि उसकी महत्ता के बारे मे।
समय के इस बदलाव मे सब कुछ संभव है । इंसांन धन धन करते कहते रह जाऐगा और अंत मे उसे
निर्धन होकर चार कंदो पर जाना ही होगा यही एक हकीकत है जिसे सब जानते तो है किन्तु समझते नही है । सबसे पहले अंतिम पड़ाव मे इसका हिसाब - किताब यही करना होता है तभी वह कही जा सकता है । यहां का किया हुआ यही पर भुगतना पड़ता है । यह भी एक कटु सत्य है । आत्मा ही परमात्मा है जो अजर अमर है । वह तो शरीर बदलते रहती है और इसी दुनिथा मे भटकते रहती है ।
ऐसी ऐसी अनेको बाते है जिसे इंसान कभी भी भूल नही पाता है कि इस दुनिया मे क्यो आया और उसका मुख्य कारण क्या है ? और वह उसी को भूल गया है । जिस दिन उसे याद आऐगा तब तक बहुत देर हो चुकी होगी । इंसानो के साथ
दुख-दर्द ज्यादा और खुशी कम मिलती है । ऐसा ही वह समय होता
जब इंसान कोई ऐसा काम जो बहुत ज्यादा जरूरी होता है उसे ही
भूल जाता है । और इस भूल को हमेशा के लिऐ भूल जाता है और याद आता ही नही है । चलो जो बात भूल जाओ बाकी के अनेको ऐसे कार्य है ,अनेको नियम है जो हमे विरासत मे मिले है उनका पालन तो कम से कम कर ले । कोई तो अच्छा कार्य कर ले ? कोई तो अपने वजूद के अंतर्गत कोई तो फर्ज पूरा कर ले अपनी इस उधार की जिंदगी का ब्याज का भुगतान तो कर ले कोई तो फर्ज ईमानदारी से निभाऐ ।
इंसान सबसे पहले यह समझने की कोशिश करे उसकी जिंदगी कैसी चल रही है, इस मुकाम पर कैसे पहुचे है ? यदि ये लोग सही समय पर आपकी मदद नही करते तो आप इतना अच्छा जीवन कैसे व्यतीत करते । आप इनके कर्जदार है । इनके दुख-दर्द मे उनका साथ देना चाहिए और अपना कर्ज उतारने की कोशिश करना चाहिए ।यदि ये लोग दुखी रहेगे तो आपको जीवन मे कभी खुशी नही मिल पाऐगी यदि मिल भी जाऐगी वह आपके किसी काम की नही है । अपना फर्ज निभाऐ। फर्ज अदा करने के भी नियम बने है । उन नियमो के अंतर्गत निभाना है ।
माता-पिता,भाई-बहिन, रिस्तेदार, यार -दोस्त, और आपके मिलने वाले लोग जिन्होनै कभी आपकी मदद की है उनके अहसान जताने का समय अब आ चुका है ,आप सक्षम भी है तो इनके अहसान उतारने की कौशिश कीजिए । वेसे तो अहसानो का बदला कभी भी कोई भी नही चुका सकता है । किन्तु अब आपका समय है या तो
सर्वप्रथम मां-बाप की सेवा ,यदि मां-बाप नहीं है तो अपने बड़े भाई चाचा चाचा उनके बच्चे बच्ची की सेवा करो, मदद करो ,उसके बाद रिश्तेदारों ,यार दोस्तों और जिन-जिन लोगों ने आपकी किस प्रकार से सहायता की है, उनकी मदद करो उनकी सेवा करो । उन्हें हर प्रकार से सुख सुविधा के साधन जुटाओ तभी आपके किए गए उपकार के बदले में, उनके अहसानो के तले दबे हुए हो उससे छुटकारा पा सकते हो । खास तौर से गुरु के प्रति सम्मान के भाव रखो । और वह भी ऐसे गुरु जिसने आपकी पढ़ाई में ,नौकरी दिलाने में किसी भी प्रकार की मदद की है ,तो उनको याद दिलाते हुए उनकी देखभाल करो उनसे हमेशा पूछते रहो कि -"किसी बात की जरूरत हो तो मुझे याद करेगा " आदि आदि बातों से संबोधन करते रहें । और यदि वह सहायता आपसे लेते हैं तो नि:संकोच उनकी सहायता करने में ही ,आपकी भलाई छुपी हुई है, यह मानकर उनकी मदद अथवा प्रॉब्लम हल करिए । यदि इंसान ऐसा ही करते रहेगा तो उसे पूरे जीवन भर में उसे या उसकी संतानों को किसी भी प्रकार का दुख नहीं सहना पड़ेगा और वह हमेशा तरक्की करते रहेंगे ऐसा मानना है गुरुजीसत्यवादी श्री रामधुन का ।
यही वो बात है जो इंसान भूलते जा
रहा है और अपने लिऐ ,अपने परिवार वालो को अप्रत्यक्ष रुप से नुकसान पहुचाने की कोशिश करते है अतः मदद के बदले मदद करना बहुत जरूरी है और नही करने पर आपको ही नुकसान पहुचेगा ।
लेखक-आलोचक-काउंसलर
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