पत्नी-पुत्र-पुत्री का प्रेम-मोह-मायाजाल

 " पति-पत्नि,और प्रेम-मोह का मायाजाल । कभी समाप्त ना होने वाला रिस्ता । यही से शुरू होता है और यही समाप्त होता है ।"
गुरुजीरामधुन ।
      वर्तमान समय मे यही रिस्ता चल रहा है बाकी रिस्ते धीरे-धीरे समाप्त होते जा रहे है । एक परिवार का निर्माण इन्ही रिस्तो से उत्पन्न होता है और लगातार चल रहा है । इसी रिस्तो को सरकारी मान्यता भी प्रदान की गई है बाकी जो रिस्ते है वे आश्रय की श्रेणी मे रखे गये है वो भी नियमो के अंतर्गत है । पहले का समय धीरे-धीरे समाप्त होते जा रहा है । अब बच्चो की जैसी ही शादी होती है वे माँ-बाप से रिस्ता तोड़ देते है और अलग रहने लगते है और वृध्दावस्था मे अलग छोड़ देते है तथा मरने के बाद जमीन-जायदाद का हिस्सा लेने जरुर आ जाते है ।
अब ऐसे मे रिस्तेदारी कैसी रही !यह तो एक प्रकार का जोर जबरन का नियम ही कहलाऐगा । जो आपका है ही नही तो उस पर आप कैसे हक जमा सकते है । भले ही वह सरकार का हो या अपने परिवार का ही क्यो ना हो । और आप उसके हकदार हो तो आपको सिध्द करना पड़ेगा कि आपने उसके लिऐ क्या क्या किया हो । ऐसै छोटे छोटे सुधार कानून मे करना चाहिए ।
इस मोह मायाजाल मे फंसे लोग अपनी नैतिकता खोते जा रहे है ।
इस लेख का उद्धेश्य यह है कि इस दुनिया मे जब बच्चे पैदा होते है तो माँ-बाप बड़े खुश होते है । उनके लालन पालन मे माँ-बाप कोई कसर नही छोड़ते तभी उनकी शादी होती है तो धीरे-धीरे माँ-बाप
को भूलते जाते है। कुछ लोग अलग भी हो जाते है । जीवन मे उनका पहला चरण और माँ-का अंतिम चरण की शुरुआत । 
यह क्रम आज से नही वर्षो से चल रहा है । कोई आश्चर्य की बात नही है । यहां पर कर्त्तव्य और उसका पालन का नियम लागू होता है । आज जो भी बुजुर्ग है उन्हे अपने बच्चो से किसी भी प्रकार की अपेक्षा नही रखे और उन्हे अच्छी शिक्षा दे अच्छे संस्कार दे ताकि उन्हे काम आऐ । अथवा स्वयं के लिऐ इतना धन बचाकर कमाकर रखे ।
इस रिस्ते मे भाई-बहन का रिस्ता भी आता है जब तक इनकी शादी नही हो जाती तब तक ये रिस्ता अधर मे घड़ी मे पेन्डूलम की तरह होता है । शादी होने के बाद पति-पत्नी के रिस्ते की शुरूआती दौड़ मे आ जाता है ।
अब इन रिस्तो का हकीकत यह है कि
वर्तमान समय में आज बुजुर्ग लोगों के ऊपर क्या-क्या अत्याचार उनके बच्चे कर रहे हैं यह सुनने को और देखने को मिलते रहता है । जो जिन बच्चों के लिए मां-बाप अपना सब कुछ निछावर कर देते हैं वही बच्चे आज उन्हें बोझ लग रहे हैं तब क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए यह भी एक विचारणीय प्रश्न है इसी वजय से अपने बुढ़ापे को व्यवस्थित रखने के लिऐ अपनी समय जरुरत के लिऐ कुछ धन संचित करके रखना जरूरी है । ये सब कार्य उस समय करना है जब आपकी उम्र 50 पार कर जाये उस समय आप सभी उत्तरदायित्व से मुक्त हो जाये जैसे बाल बच्चो की शादी हो जाये । उनके बाल-बच्चोके होने बाद उनकी जिम्मेदारी अपने उपर ना ले । और आप सक्षम है तो सभी लोगो की मदद कर सकते है । पैसा ही बुढ़ापे को सुरक्षित रख सकता है । यदि आप सरकारी-अर्दसरकारी कर्मचारी है तो अपने पैसो का ऐसा उपयोग करे कि आपको हर माह पैसा मिलता रहे ऐसी व्यवस्था करे । 
सब आपको ही करना है । किसी के बहकावे मे ना आऐ भले ही वह अपने कितना ही नजदीकी क्यो ना हो । बस अपना आखिरी रिस्ता जो रह गया है पति-पत्नी का रिस्ता है वही अंतिम सच है ,उसे निभाऐ ।
गुरूजीसत्यवादी श्रीरामधुन
लेखक-आलोचक-सलाहकार



   

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