"मै, यूं ही अज्ञातवास पर नही गया हूं "

"मै, यूं ही अज्ञातवास पर नही गया हूं  " !
        कोई भी इंसान बिना कारण के अपना घर-बार छौड़कर ,अपना काम- धंधा,व्यवसाय,जनहित निशुल्क कार्यो को छोड़कर अचानक अज्ञातवास पर चला जाता है और इन कारणो को सारी दुनिया के समक्ष अपने लेखो के माध्यम से प्रस्तुत करता है । फिर भी उस पर कोई कार्यवाही नही होना ढेरो प्रशन्नो को जन्म देता है ?
इससे बड़ी बात तो यह है कि इस प्रकरण ना तो केन्द्र सरकार ने ध्यान दिया और ना ही म०प्र० सरकार ने ध्यान  दिया । बात यही समाप्त नही होती इस बारे मे आमजनता ने भी कोई सहयोग नही दिया ! इन सब बातो से सिध्द
होता है कि कही ना कही कुछ अच्छा अथवा बुरा होने वाला है ।
यह सब समय पर ही छोड़ दिया जाना उचित प्रतीत होता है ।
गुरूजीसत्यवादी श्रीरामधुन
"टीलेश्वर माहराज" भोपाल 

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