"मोदीजी का एक ओर सच "-

मोदी जी का एक और सच -
     मोदी जी का ऐसा सत्य जिसको
आमजनता नही जानती है उस सच को सामने ला रहे है गुरूजीसत्यवादी श्रीरामधुन । 
इस सत्य की खोज मे लगभग 06 माह तक अज्ञातवास मे रहकर अनेको जगह भ्रमण कर , दुख-तकलीफ को सहन कर , चिंतन-मनन कर खोजा गया है । इस कहानी की शुरुआत कहां से हुई , कहां पर समाप्त हुई । जिसकी शुरुआत भोपाल म०प्र० से हुई है और संभवतः भोपाल (छत्तीसगढ़) के बीहड़ क्षेत्रो मे इसका समापन होगा ।
           टूस्ट "माँ आदिशक्ति दर० धार्मिक एवं परमार्थ टूस्ट" भोपाल
के गठन से लेकर आज तक अपने अस्तित्व की लड़ाई मे संघर्षशील है फिर म०प्र० शासन व केन्द्र सरकार ने कोई उचित कार्यवाही नही की । इस कारण से टूस्ट के अध्यक्ष रुष्ठ होकर , विधान-सभा 2024 के चुनाव का वहिस्कार कर अज्ञातवास पर चले गये ।
     अज्ञातवास अभी भी जारी है जबकि लोकसभा 2024 का चुनाव
भी होने वाला है । अब देखना है कि
इस चुनाव पर अज्ञातवास का क्या असर पड़ता है । विधान सभा चुनाव मे तो असर देखने को मिला था । अब लोक सभा का नतीजा भी देखते है उसके बाद ही आगे क्या करना है,सोचा जाऐगा ।  टूस्ट की मांग  चुनाव से पूर्व हो जाती है तो बहुत अच्छी बात है अन्यथा कोई बात नही यह दोष भी सरकार  का ही होगा ! कुछ ना कुछ दुस्परिणाम तो अवश्य होगा । यह बात प्रकृति  ने पूर्व से निर्धारित कर रखा हे । 
समय और धर्म कर्म पर आधारित यह एक भावी योजनाओं
के अंतर्गत कभी ना रुकने वाली वारदात वाली कहानी है ।
           मोदीजी के बारे अनेको कहानीयां, घटनाएं आऐ दिनो नानाप्रकार से प्रसारित होते रहती है । इनकी कार्यशैली के अध्ययन के बाद एक सच्ची बात निकलकर सामने आई है जिसे वे स्वयं वे भी भूल गये है । देश की वर्तमान समयकाल की स्थितीयो मे परिस्थितियों मे बदलाव होना स्वभाविक प्रक्रिया के अंतर्गत होते ही  रहता है ।
     इतिहास मे राजा-माहराजाओ के बारे मे जो लिखा गया है वह अपनी जगह सत्य लिखा है । इतिहास का अध्ययन करने से पता
चलता है कि लोगो ने अपने आपको इतिहास मे नाम अंकित करवाने के लिऐ ना जाने क्या क्या काम किऐ है,ना जाने कितने प्रपंच रचे और अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया ,पूरा जीवन दांव पर लगा दिया तब कही जाकर उनका नाम अमर हुआ । जैसे सम्राट चन्द्रगुप्त मोर्य, अशोक चंद्रगुप्त मोर्य, चाण्यक,हिटलर आदि अनेको नाम है । वर्तमान समय मे भी उसी की पुनरावृत्ति हो रही है । राजनीति मे कूटनीति का समावेश देखने को मिल रहा है । 
अज्ञातवास मे बहुत अध्ययन करने के पश्चात सोच-विचार कर यही निर्णय निकल कर सामने आया और यही हमारे देश के सिपाहसालार यही कर रहे । इतिहास की बारीकी से अध्ययन कर देश की राजनीति और कूटनीति का इस्तेमाल किया जा रहा है । इसका प्रभाव आगे चलकर
क्या पड़ेगा ? इससे उन्हे कोई मतलब नही है बस इतिहास की हेडलाइन मे उनका नाम आना चाहिए । उस समय के राजाओं  को गुरुकुल मे पढ़ाई करना जरुरी था । जीवन मे जिन चीजो की जरूरत थी उसे मे कैसे प्राप्त होती है और उसके लिऐ क्या करना पड़ता है उसे पढ़ाया जाता था । सभी प्रकार की शिक्षा दी जाती थी। इस शिक्षा मे धार्मिक शिक्षा,धार्मिक कर्मो पर विशेष ध्यान दिया जाता था चूंकि उस समय भी अंधविश्वास था और आज भी है  !
 हमारे देश का व्यक्ति पढ़ा-लिखा है कि नही जरुरी नही है किंतु उसका सहायक का पढ़ालिखा होना जरुरी है । आज मोबाइल से सभी प्रकार की जानकारियां मिल जाती है अतः
मोबाइल चलाने और पर्याप्त समय का  होना जरुरी है । अब तो एक बंद कमरे मे बैठकर देश को चलाया जा सकता है । अध्ययन की जरूरत ही नही है बस आर्डर देना वाला चाहिए, शक्ति से चलाने वाला चाहिए । जिसमे साम, दाम, दण्ड, भेद शस्त्र चलाना आता है वही शासन चला सकता है । यह सर्वविदित है इसमे कोई भी नई बात नही है । राजनीति मे कूटनीति का संमिश्रण कर कोई भी जंग जीती जा सकती है । वही हो रहा 
है । इतिहास पर इतिहास रचते हुऐ
कैसे आगे बढ़ सकते है उसके लिऐ योजनाबध्द तरीके से कार्य किया जाये तो सफलता निश्चित है यही चाड्क्यनीति है वही चल रही है और आगे भी चलते रहेगी । लोग आते रहेगें जाते रहेगें । राजा- माहराजा आते रहेगे जाते रहेगे और इतिहास पर इतिहास रचते रहेगें ।
समस्या जहां होती है वही उसका हल भी होता है । इस नीति से सब कुछ संभव है ।
इतिहास बनाने के लिऐ हर संभव कोशिश करना अनुचित नही है किंतु हर सीमा को लांघना गलती है  ।
गुरूजीसत्यवादी श्रीरामधुन
लेखक-आलोचक-सलाहकार

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