"नजरबंद " की सजा क्या पर्याप्त है ?
"नजरबंद "की सजा क्या पर्याप्त होती है ?
नही ! यह एक मानसिक प्रताड़ना है जिसका उपयोग कानून मे संभव नही है । किंतु पहले के समय मे इसका उपयोग होता था जो दो प्रकार से दी जाती थी -
1* नजरबंद मे निगरानी के तौर पर रखा जाता था जब तक उसकी जांच पूरी नही हो जाती थी । सुविधाएं पूरी दी जाती थी ।
2* नजरबंद मे कारावास रखा जाता था तब तक के लिऐ जब तक उस पर चल रहा होता था ।
किंतु यह एक प्रथा व नियमो पर आधारित एक सजा थी जो समयानुसार बदलती रही ।
किंतु अभी भी यह नियम,प्रथा वर्तमान मे चल रही है यह अरविंद केसरीवाल की गिरफ्तारी मे देखने को मिला है । ई डी ने जब केजरीवाल से गहन पूछताछ के समय मे इस्तेमाल किया था । ई डी का कार्यालय नई दिल्ली मे बनाया गया जो वातानुकूलित है जिसमे कैदीयो को रखने और पूछताछ के लिऐ सुसज्जित वातानुकूलित कमरे मे रखा था जिसमे सभी प्रकार की सुविधाओं की व्यवस्था है । ऐसे वातानुकूलित कार्यालय कैदियों के लिऐ बनाऐ गये या सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों के लिऐ बनाए गये है यह आमजनता भी जानना चाहती है । इतना मान-सम्मान सरकार द्वारा दिया जाता है एक अपराधी को और अंत मे वातानुकूलित कमरे से सीधा तिहाड़ जेल भेजा जाता है।
ठीक इसी प्रकार से सरकार द्वारा वृध्दजनो के लिऐ भी ऐसी ही व्यवस्था की है और वृध्दाश्रम भी बनाने की पहल कर दी है जो वातानुकूलित है जिसका किराया बहुत मंहगा है । हमारा भारत देश पहला देश है जो वातानुकूलित आश्रम बनाकर किराया वसूल किया जाता है । अब वह दिन भी दूर नही है जब हमारे देश मे सभी जैल वातानुकूलित होगे और सजा भुगतने वाले कैदियों के घर वालो से भुगतान मांगा जाऐगा । सरकार को तो हर देय चीजो का पैसा चाहिए।
वृध्दाश्रम और जैल मे कोई फर्क नही है दोनो ही नजरबंद सजा काटने के लिऐ उपयुक्त जगह है । इसी से मिलता जुलता अज्ञातवास मे जीवन गुजारना होता है । एक स्वैच्छिक होता है तो दूसरा मानसिक प्रत्याड़ना होती है । यह प्रशन्न बुध्दिजीवी वर्ग से है उनके विचारो का स्वागत है कि उक्त लेख पर अपना विचार प्रकट कर मार्गदर्शन प्रदान करे !
लेखक-आलोचक-गांधी- विचारक
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