इंसानियत दम तोड़ती,प्रकृति डराते हुई

इंसानियत अपना दम तोड़ती हुई और प्रकृति अपना रौद्र रुप दिखाने लगे तब हम उसे अपने  अंतर्मन 
से दूर करने के लिऐ उपाय करना ही
होगा ।
प्रकृति कोई भी बुरी चीजे नही देती है तो ऐसी ही अपेक्षा वह इंसान से भी रखती है । ज्यादा जल का उपयोग करोगे तो पीने के लिऐ एक ना दिन जरूर तरसोगे । वृक्षो को नष्ट करोगे तो वायु आँक्सीजन की कमी होगी । पृथ्वी का खनन करोगे तो तो उसकी उर्वरकता नष्ट होगी । इस प्रकार से अनेको चीजो का उपयोग किया जा रहा है जो प्रकृति का रुष्ठ होना एक स्वभाविक प्रक्रिया के अंतर्गत है अतः इन बातो को ध्यान मे रखते हुए हमे प्रकृति  की रक्षा करना चाहिए यही हमारी इंसानियत के अंतर्गत फर्ज भी है । 
प्रकृति डरावनी है और वह मानवता को ठीक से ना रखने के लिए महामारी फैलती है ।
फिलहाल अच्छा यही होगा कि हम प्रकृति से डरें क्योंकि  प्रकृति हमारे साथ बराबर करने का फैसला करती है तो हजारों लोग प्रभावित होते हैं । प्रकृति के भयानक  पर फिर मत चिल्लाना क्योंकि यह तो सिर्फ तेरा ही कर्णम है । इंसान तू क्यों लड़ रहा है ,प्रकृति को भूल मत । तू भी इसी प्रकृति में जन्मा है और इसी की देन है वृक्ष पर वृक्ष कटवा कर बंद कर यह नवनिर्माण पल भर में के डगमगाथ से डर जाएगा तेरा अभिमान ।
प्रकृति अनादि और अनंत है जबकि मनुष्य जैसी कई प्रजातियां कालांतर में आई और चली गई यदि इंसान प्रकृति के साथ छेड़छाड़ करता रहा तो प्रकृति भी एक दिन इंसान के वजूद के साथ छेड़छाड़ करना शुरू कर देगी ?
प्रकृति इंसान के लिए बहुत जरूरी है, इंसान के बिना प्रकृति रह सकता है लेकिन प्रकृति के बिना इंसान एक पल भी नहीं रह सकता है ।
    खनिज खाद्य पर्यावरण या वातावरण सभी प्रकृति की देन है बिना प्रकृति के जीवन संभव नहीं है । प्रकृति खुद का संतुलन बनाकर रखती है। मनुष्य प्रकृति के संतुलन को खुद के स्वास्थ्य के लिए बेकार रहा है खाने को विज्ञान प्रकृति कर रहा है । लेकिन प्रकृति को नष्ट भी कर रहा है सभी भौतिक सुख साधन प्रकृति से मल प्राप्त तत्वों से बनते हैं और उन मूल तत्वों को प्राप्त करने के लिए प्रकृति का बे हिसाब दोहन किया जा रहा है प्रकृति के पुनर्भरण की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है जो कोशिश की जा रही है वे आप पर्याप्त हैं। इसके लिए एक बड़े जन समर्थन से ही प्रकृति को फिर से संभाला जा सकता ।
प्रकृति प्रत्येक इंसान को आगे बढ़ने का मौका देती है, लेकिन हर इंसान इसका लाभ क्यों नहीं उठा पाता । क्योंकि समय की कद्र हम इंसान समझ नहीं पाते हैं ।
क्या प्रकृति से डरना जरूरी है ?
               बहुत जरुरी है !
     ऑस्ट्रेलिया का एक ऐसा शहर है जो आज दुनिया में सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर बन गया है कारण, ऑस्ट्रेलिया में सभी ऑस्ट्रेलिया में लगी आग जिसे स्थानीय भाषा में ऑस्ट्रेलिया बस फायर कहा जाता है यह आज लगभग पूरे ऑस्ट्रेलिया में इस तरह से फैली है कि ऑस्ट्रेलिया के कई शहरों में आपातकाल लगाया जा चुका है। इस आग से करने वाल करने वाले लोगों की संख्या 25 से अधिक भी ज्यादा हो चुकी ,धुएं और काम की वजह से कई लोग अपने घर छोड़कर जा चुके हैं और 13.5 मिलियन एकड़ में से ज्यादा कृषि योग्य जमीन इस आग में बर्बाद हो चुकी है। 
ब्राजील के अमेजॉन में जब आग लगी थी तब वह आग मानव द्वारा लगाई गई थी ब्राजील के राष्ट्रपति जयबोलोसोनारो चाहते थे कि अमेजॉन के जंगल का कुछ भाग हटाकर उसकी जगह खेती योग्य भूमि को बढ़ाया जाए इसलिए अमेजॉन के जंगल जलाए गए थे।
   ऐसे ऐसे अनेकों उदाहरण इस दुनिया में पाए गये है जिससे यह सिध्द होता है कि इंसान ही प्रकृति की छेड़छाड़ कर रहा है जिसकी वजय से प्रकृति रूष्ट होकर तांडव मचा रही है । कभी भी किसी भी समय मौसम मे जो बदलाव आ रहा है यह सब ठीक नही हो रहा है इसके लिऐ समूचे देश को आगे आ कर इसमे हिस्सा लेना होगा तभी इस विनाश लीला को रोकना होगा
तभी कुछ हो सकता है । 
गुरूजीसत्यवादी श्रीरामधुन
लेखक-आलोचक-व० सलाहकार

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