आज का इतिहास मे नये आवाम

भारत का संविधान मे दिनोदिन नये नये नियम बनाए जा रहे है और ये वे  नियम है जो सांसद मे नही पास हो रहे बल्कि माननीय न्यायालय द्वारा प्रदान किए जा रहे है । ये सभी फैसले अपना इतिहास रचते हुए सरकार की नाकामी
सिध्द कर रही है  । इन इतिहासिक फैसलो मे वहा की सरकार और सरकारी कर्मचारियों की लचर व्यवस्था को अप्रत्यक्ष रुप से प्रदर्शित
करती है ।
इतिहासिक फैसला :-
(1) आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट का फैसला एक इतिहासिक फैसले के अंश - आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने गुरुवार को एक 8 आईएएस अधिकारियों के खिलाफ अदालत की अवमानना के मामले में सजा सुनाई है कोर्ट ने उन्हें 2 सप्ताह के लिए जेल भेजने का आदेश दिया था आदेश के बाद माफी मांगने पर कोर्ट ने नरमी दिखाते हुए अपने फैसले को संशोधित किया अदालत ने सभी आईएएस अधिकारियों को एक साथ मिलकर कल्याणकारी अस्पतालों में समाज सेवा करने के निर्देश दिए हैं ।
फैसला व निर्णय अति उत्तम है । अब प्रशन्न उठता है कि क्या ऐसा ही म०प्र० मे चलित मान० न्यायालय ऐसे
फैसले क्यो नही लेते है ? आज "विशेष न्यायालय इंदोर" मे विजयवर्गीय, मेदोला सहित अन्य पर कार्यवाही की मांग पर "पेशंन घोटाला"पर 17 वर्ष बाद भी कैलाश
के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति नही दिए जाने का मामला सरकार और मान० न्यायालय पर प्रशन्नवाचक चिन्ह अंकित कर रही है ?
आज इन्ही बातो को ध्यान मे रखते हुए म०प्र०हाई कोर्ट ने विशेष अधिकारो के तहत 235 न्यायिक अधिकारियों का स्थान्तरण का आदेश
निकाला है ।
घर देने का सपना दिखाने वाली सरकार ही घरो के समानो को मंहगा कर रही हे ?
शराब को बढ़ावा देने वाली सरकार
इस पर पावंदी क्यो नही लगा पा रही आज शराब के कारण कई घर तबाह हो रही हे , मृत्यु ग्राफ बढ़ते जा रहा है ।
आज "माँ आदिशक्ति दर०धार्मिक एवं परमार्थ टूस्ट भोपाल म०प्र० शासन की नीतियो के कारण बहुत ज्वादा परेशान हैं । शासन की नीति
और न्यायालीन कार्यवाही से बचने तथा समय से बचने से बहुत परेशान है ।सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार से परेशान है । शासन की हर साख पर एक ऊल्लू बैठा है । सत्य विलोपित होते जा रही है ।
गुरुजीसत्यवादी श्रीरामधुन
"श्रीरामधुनकाँम"

 


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