भिक्षा के पात्र,देश के सबसे बड़ेदुश्मन!

"भिक्षा के पात्र लोग ही देश का सबसे बड़ा दुश्मन " ! 
      भिक्षावृत्ति किसी भी देश के लिऐ एक शर्मनाक बात है जो कभी
भी समाप्त नही हो सकती है । जबकि हर देश इसको समाप्त करने के लिऐ अनेको उपाय कर रही है फिर भी समाप्त नही हो पा रही है । सरकारी योजनाओं मे घोर
अनियमितताओ के चलते,व्याप्त भ्रप्टाचार के कारण इन पर काबू नही पाया जा सकता । ये सरकारी योजनाएं भी एक प्रकार से भिक्षा ही है,खैरात है जो मुफ्त मे दी जाती है । इसे भी पहले रोका जाना चाहिए । इस भिक्षा से सरकार लाभ कहां मिला । भिक्षा भी लेते रहे और जब सहयोग देने की बारी आई तो साथ नही दिया ।   भ्रष्टाचार की जड़े दिनो-दिन गहरी होती जा रही है । सरकार सब जानती है लेकिन कुछ नही कर पा रही है चूंकि सरकार को भी इससे कही ना कही लाभ हो रहा होगा तभी तो इसे बंद नही कर पा रही है । 
       वैसे कही कही ईमानदारी भी दिखाई दे जाती है वह भी आश्चर्य की बात है तभी तो दुनिया चल रही
है । भिक्षा लेना व  देना दोनो ही गलत है । इस भिक्षा लेने व भिक्षा देने के कुछ नियम भी है जो आमजनता  के द्वारा ,धर्मशास्त्रो मे ऊल्लेखित है । भिक्षा के पात्र कौन है ? दान के पात्र कौन है कौन नही है ? सभी बातो का उल्लेख सभी धर्मशास्त्रो मे उल्लेख किया गया है । उन्है पढ़ने से हमे वास्तविकता ज्ञात होती है । तो हम यह प्रतिज्ञा ले कि हम भिक्षा कभी भी नही लेगें और ना ही देगे । और हाँ कुछ प्रकरणो मे वाजिब है तो दे सकते है । यहां तो भिक्षा ही लेने-देने की बात को गलत ठहरा रहे है जबकि दान लेना-देना भी गलत है उस पर भी बहुत सोच समझकर ,जाँच -
पड़ताल करके ही लेना-देना चाहिए
अन्यथा दोनो को भारी क्षति उठानी
पड़ती है । इसके भी नियम है । 
     इस सबंध मे सरकार को मान० अदालत को पारदर्शिता लाने की पहल करनी चाहिए । पहल भी की जा चुकी है जिसमे गेंहू के साथ घुन भी पिस गये है पारद्शिता ना होने के कारण ।
गुरुजीसत्यवादी श्रीरामधुन
लेखक-आलोचक-काउंसलर

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