मेरा आइना,मै स्वयं !
आज सब कुछ बदलता जा रहा है । दुनिया कहां से कहा पहुच रही है लोग अपने आपको भी पहचानने से इंकार कर रहे है और दर्पण के सामने खड़े होकर अपने आप से अनेको सवाल कर रहे है। आज स्थितियो मे काफी परिवर्तन आ चुका है । आईना पर दिखने वाला प्रतिबिंब भी बदलते जा रहा है और बीच-बीच मे अनेको सवाल पूछते रहता है । कल-आज-कल का इतिहास-वर्तमान-भविष्य के बारे मे ढेरो सवाल पूछता आईना मे उलझता आम- मानव दुविधा मे है । जब आप नकारात्मक बातों को भूलकर आगे बढ़ जाते हैं तो इसके परिणाम ना केवल आपके सिर से बहुत बड़ा बोझ उतर जाता है बल्कि आपके स्वयं के प्रति प्रेम का द्वार भी खुल जाता है । हमे अपनी सोच बदलने के लिऐ कुछ उपाय करते रहना चाहिए :- 1* स्वयं की आलोचना करना बंद करें ! 2* सबसे पहले उस आईना मे देखे कि हमारी गलती कहां हो रही है ? 3* हमारे मन मे चल रहे बुरेविचार नाकारात्मता भाव को हटा कर साकारात्मक भाव लाऐ ।साथ ही स्वयं की आलोचना करना भी बंद करे । 4* हमें अपने आप को डराना भी बंद करना होगा । 6* स्वयं के प्रति विनम्र और ...